बैंकों, डाक घरों के बचत खातों से ट्रांजैक्शन करने के लिए कोइ सीमा नहीं !

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आज स्पष्ट किया है कि 2 लाख रुपये से ज्यादा के कैश ट्रांजैक्शन पर रोक का नियम बैंकों और डाक घरों के बचत खातों पर लागू नहीं होगा। सरकार ने वित्तीय कानून 2017 के जरिए 2 लाख रुपये से ज्यादा के नकदी लेनदेन पर रोक लगा दी और यह प्रावधान कर दिया कि इस सीमा ज्यादा जितनी नकद राशि का लेनदेन होगा, उतना ही जुर्माना वसूला जाएगा।

आय कर कानून में जोड़ी गई नई धारा 269ST पर स्पष्टीकरण देते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा कि यह पाबंदी बैंकों और डाक घरों पर लागू नहीं होगी। एक बयान में कहा गया है, ‘यह फैसला भी लिया गया है कि नकदी लेनदेन पर पाबंदी बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक या पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक से निकासी पर लागू नहीं होगी।’

बैंक और डाक घर की तस्वीरे

सीबीडीटी ने कहा है कि सरकार, बैंकिंग कंपनी, डाक घर बचत बैंक या को-ऑपरेटिव बैंक की ओर से मिली रिसीट पर भी यह पाबंदी लागू नहीं होगी। सीबीडीटी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लिए नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च संस्था है। सीबीडीटी ने कहा कि इससे जुड़ी जरूरी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

दरअसल, साल 2017-18 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 3 लाख रुपये से ज्यादा के नकदी लेनदेन पर पाबंदी लगाने का ऐलान किया था। लेकिन, फाइनैंस बिल में इसकी सीमा घटाकर 2 लाख कर दी गई और पिछले महीने इसे लोकसभा से पास भी करवा दिया गया। एक सीमा के बाद नकदी लेनदेन पर पाबंदी लगाकर डिजिटल इकॉनमी को बढ़ावा देने का मकसद काले धन पर रोक लगाना है।

नियम के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक दिन में 2 लाख रुपये से ज्यादा का नकद लेनदेन नहीं कर सकता। इसमें एकबारगी लेनदेन और किसी एक आयोजन या समारोह के लिए बारबार का लेनदेन शामिल है। फाइनैंस ऐक्ट में यह भी कहा गया है कि 10,000 रुपये से ज्यादा का कोई पूंजीगत खर्च भी निवेश से जुड़ी छूट या मूल्य कटौती भत्ते के काबिल नहीं माना जाएगा। इसी तरह, राजस्व खर्च के रूप में भी नकदी की सीमा 20,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दी गई है।

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